सुहाना सफर

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Feb 20, 2020

सुहाना सफर और ये मौसम हसी हमें डर है हम खो न जाएँ कहीं

ये कौन हँसता है फूलों में छुपकर बहार बेचैन है किसी धुन पर कहीं गुनगुन, कहीं रुनझुन, कि जैसे नाचे ज़मी सुहाना सफर…

येगोरी नदियों का चलना उछलकर के जैसे अल्हड़ चले पीसे मिलकर प्यारे-प्यारेये नज़ारे निखार है हरकहीं सुहाना सफर…

वो आसमां झुक रहा है ज़मीं पर ये मिलन हमने देखा यहीं पर मेरी दुनिया, मेरे सपने, मिलेंगे शायद यहीं सुहाना सफर…

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