दुआ

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Feb 26, 2020

कीस पुचु है ऐसा क्यू बेज़ुबान सा ये ये है की ख़ुशी के पल ख़ान ढंडू बेनिशा सा वक़्त भी यार है

जाने किटने लबों पे गिले है ज़िन्दगी से काई फ़ासले है बेस जितते है सपने क्यूँ आंखें मैं लकीर जब छुटे में हाथन से यूं बेवजह

जो भीजी थी दुआ

वो जाके अस्सलामन से यूं तकरा गइ के आ गइ है लुत के सदा

जो भेजी थी दुआ वो जाके अस्सलामन से यूं तकरा गइ के आ गइ है लुट केडा

साँसों न कहैं रूख मोद लिया कोई रह नज़ार में ना आवे

धड़कन न कहन दिल छोड दीया छाँड़ में जिस्मों में सई

याहि बार बर सोचता हू तन्हा मेन यहान मेरे साथ साथ चल रहा है याद

जो भेजी थी दुआ वो जाके अस्समान से यूं तकरा गइ की आ गइ है लुट गया

जो भेजी थी दुआ वो जाके अस्समान से यूं तकरा गइ की आ गइ है लुट गया

जो भीजी थी दुआ …..

वो जाके अस्सलामन ।।

जो भीजी थी दुआ …

भेजी थी दुआ ।।

भेजी थी दुआ …

भाजी थी दुआ …।

भेजी थी दुआ …

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