तुम ही आना

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Feb 18, 2020

तेरे जाने का गम
और ना अाने का गम
फेर ज़मने का ग़म
क्या करे?

रहह देके नज़र
रट भर जग कर
पर तेरी तोह खाबर ना मिले

बहत आये गय येदीन
मगर इस्सर बड़ तुम ही आना
ट्रेड फिर से जान के न लना
तुम ही आना!

मेरी देहलीज़ से होकर
बहारेन जब गुज़रती हैं
याहं के धप को सावन
हवयँ भइ बरसत हिन

  1. हूमिन पुचो क्या गरम है
    बीना दिल के लिए जान
    बहत आये गय येदीनमगर इस्सर बड़ तुम ही आना

    0 ..

    कोइ तोह रहह ह़ोगी
    जो मेरे घर को आटी है
    कारो पीच सबदो का
    सुणो की कां चहत है …

    तम अहोगे मुजे मिल्ने
    खाबर ये भई तुम ही लाना
    बहत आये गय येदीन
    मगर इस्सर बर तोही आना

    Marjaavaan।
    Marjaavaan।

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