जायसी हो वैसी राहो

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Feb 23, 2020

जायसी हो वासी राहो बड़लो ना जरा सा भई मेरी हो म्हारा रहो सोचो ना जरा सा भी (X2) रुकता है वक़्त क्या है ये कैसा केसी ये लिय़ा सबके बाद कलकता है तो पर है कसम तुम ना तुम कभी नहीं देको थोडी सी उमर जोशी पास है। संग संग गुजराँगे सुख दुःख बाते लागे तुम साथ मेरा अगार दो तो ये जो पाल आया है फिर कभी ना सेेने से लिपटि रहौ सो एक ना जरा सा भई जाऊ हो वैसी रहलो बड़ो नाहरा जरा सा भी मेरी मेरी हो तो रह जाऊं, सो जाऊं तो क्या है।जायसी हो वसी रहो … मेन टू तुमरे लइय चंद सिटारो को धेज में पिरोया है जुगनू की रोशनी भी लेके आया हूं जरा देखो। खुशबू तुमहारी मांन बांधे के राखी अपना सिराने पे रात भर जगता हूं नेंदीन जरा तुम लुटा दो … हं कहो हमारे मुज पास मेरे ये क्या ज़मीन हमारे हमारे प्लाज्मा एक हो जाने दो जायसी हो वासो रहलो बड़ो नाही ज़रा सा भी मेरी मर्ज़ी हो जाए। सोंचो ना जरा सा भी जायसी हो वैसी रहो …

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