जब कोई बात बिगड जाए

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Feb 20, 2020

जब कोई बात बिगड़ रही हो, जब कोई मुश्किल पड हो तुम साथ दे मेरा, ओ हमनवाज ना कोई है, ना कोई था, जिन्दगी में तुम्हारे सिवा तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवाज

हो चांदनी जब रात तक, देता है हर कोई साथ तुम मगर अंधेरो में ना छोड़ना मेरा हाथ जब कोई बात बिगड़ जाए

वफादारी की वो रस्मी, मुश्किलयेंगे हम आप कस्मे एक भी सांस जिन्दगी की, जब तक अपने बस में हो जब कोई बात नहीं हो रही होगी

दिल को मेरा हुआ यकीन, हम पहले भी मिले कही सिलसिला ये सदियों का, कोई आज की बात नहीं जब कोई बात नहीं होगी।जब कोई बात बिगड जाए

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