इक मुल्क़त में

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Feb 25, 2020

म्हारे भई हूं तू भी है आमने-सामने

दिल को बेहका दीया इश्क का नाम है

म्हारे भई हूं तू भी है आमने-सामने

दिल को बेका दीया इश्क़ में जान न मुसल्सल नज़र बाराती राही तरसते हैं हम भीगे बारसात में

इक मुल्क़त …

इक मुल्क़त में, बाते ही बाते हैं, उनका यूं मुसकुराना ग़ज़ब हो गया, कल तालक वो जो मेरे ख्याल में, रुबरू उका आना ग़ज़ब हो गया ।।

Mohabbat ki pehli mulaqaat ka Asar dekho na jaane kab ho gaya Ik mulaqaat mein, baat hi baat mein Unka yun muskurana gazab gaya

मखतबर दरद कख खयल नइ इक इक तफह मुख्य कहिन, इक तरफ दिल कहिन

आंखें का एतबार मैट कर्ण

ये यूथे से क़ातल-ए-आम करति हैं कोइ इंकी निगाहों पे पेहरा लगावो यारों ये निगाहों से है ख़ंजर का काम कर रही हैं

मखतबर दरद कख खयल नइ इक इक तफह मुख्य कहिन, इिक तराफ दिल कहिनस हमे ज़मीन पे क्यूँ दुआं उतने रहत जल रा दिल दिल मेरा पूत कुच नाही

क्यूँ ख़यालोन में कुच बरफ़ सी गीर रहि रिट किस की ख़्वाहिशों में नामी भर रहि मुसल्सल नज़र बस्ति राही

तरसते हैं हम भीगे बरसत मे

एक मुल्कत …

इक मुल्क़त में बाते हैं

उनका यूँ मुसकुराना गज़ब हो गया कल कलक जो मेरे ख्यालों में हैरुबरु उंका अनाना ग़ज़ब हो गया

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